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बात हदसे गुजर गयी होती

बात हदसे गुजर गयी होती
मेरी चाहत में खो गयी होती ।
रास्ते खुद ही बोल देते है
मंजिलों को अगर दुआ देती ।।

तू बडी है तो छोटा मै कैसे
दीपको मे है रोशनी जैसे ।
तेरी चौखट पे शीश रख देता
तू भी होती रहा हूँ मै जैसे ।।

कहना नटना हमे नहीं आया
लगता तुझको तभी नही पाया ।
झूठ की तू बनी पहेली हो
सत्य सुनना तुझे नही आया ।।

मेरी आदत बनी हो अब भी तू
खारे सागर का जल थी तब भी तू ।
मेरे होठो की प्यास हो लेकिन
जैसे पहले रही हो अब भी तू ।।

सीचना भी तुझे नही आया
खीचना भी हमे नही आया ।
दोनो नदियों के दो किनारे है
हमे मिलना कभी नही आया ।।
डा दीनानाथ मिश्र

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3 Comments

Arti khamborkar

13-Oct-2023 06:06 AM

v nice

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Mohammed urooj khan

12-Oct-2023 11:24 PM

👌👌👌

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RISHITA

12-Oct-2023 10:47 AM

Amazing post

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